Wednesday, May 1, 2013

सत्यजित राय की अभिजान (१९६२): फिल्मों में मगही भाषा का प्रवेश

(सत्यजीत राय के जन्मदिन (२ मई) पर विशेष )


प्रसिद्द बांग्ला लेखक एवं साहित्यकार ताराशंकर बंद्योपाध्याय के उपन्यास “अभिजान” पर फ़िल्मकार सत्यजीत राय ने इसी नाम से एक फिल्म बनायी थी. सितम्बर १९६२ में प्रदर्शित हुई इस फिल्म की मुख्य भूमिकाओं में सौमित्र चटर्जी और वहीदा रहमान थे. सौमित्र चटर्जी ने एक राजपूत टैक्सी ड्राइवर की भूमिका निभाई थी. वहीदा रहमान ने एक भगायी गयी औरत की भूमिका निभाई थी. उनका नाम गुलाबी था जो मगही भाषा बोलती है.
बिहार के मगही साहित्यकार एवं कवि हरिश्चंद्र प्रियदर्शी ने मगही भाषा को पहले पहल सिने पटल पर प्रवेश दिलाने के लिए समस्त मगही भाषी लोगों की तरफ से धन्यवाद देते हुए फ़िल्मकार एवं निर्देशक सत्यजीत राय को एक पत्र लिखा था. सत्यजीत राय ने उस पत्र के जवाब में एक पत्र हरिश्चंद्र प्रियदर्शी को लिखा था. प्रस्तुत है मूल पत्र (जो अंग्रेजी में था) का हिंदी अनुवाद, जिसे आज भी हरिश्चंद्र प्रियदर्शी ने सम्भाल कर रखा हुआ है. 
 सत्यजीत राय
3 लेक टेम्पल रोड, कलकत्ता- 29
26 जनवरी 1963 

प्रिय श्री प्रियदर्शी,
मुझे आपका मेरी फिल्म अभिजान और उसमें मगही भाषा के प्रयोग से सम्बंधित कृपापूर्ण पत्र मिला. ऐसी सराहना सचमुच बड़ी संतोषदायक है और मैं चाहता हूँ कि आप मेरा हार्दिक धन्यवाद स्वीकार करें.
शुभकामनाओं सहित
आपका विश्वासी
सत्यजीत राय


ठीक इसके बाद मगही भाषा में फिल्में बनीं. मगही भाषा में बनी पहली फ़िल्म थी “मोरे मन मितवा” जो सन १९६५ ई० में प्रदर्शित की गयी. इसके निर्माता थे आर०डी०बंसल और निर्देशित किया था गिरीश रंजन ने. ज्ञातव्य हो कि ‘मोरे मन मितवा’ फिल्म के पांच गीत हरिश्चंद्र प्रियदर्शी ने ही लिखे थे. जिसमें मो० रफ़ी और आशा भोंसले का गाया गीत “कुसुम रंग लहंगा” और मुबारक बेगम की गयी ग़जल “मेरे आंसुओं पे न मुस्कुरा” काफी लोकप्रिय हुए थे.  

-नवनीत नीरव-

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